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शब्द मुझे नहीं चाहिए

शब्द मुझे नहीं चाहिए।
विचार निरर्थक और बेकार हैं।
मेरी आत्मा में प्रेम का ज्वार दैडे़गा
और जिप्सी की तरह कहीं दूर पर
मैं प्रकृति को अपनी संगिनी बनाऊँगा
और सोचूँगा, मेरी बगल में
कोई लड़की पड़ी है।
×  ×  ×  ×  ×  ×  ×  ×  ×  ×
क्षितिज से क्षितिज तक मैंने रस्सियाँ जोड़ी हैं,
खिड़की से खिड़की तक मैंने फूलों के हार सजाए हैं,
और सितारों से सितारों तक
मैंने सोने की जंजीरें तान दी हैं
जिससे उन पर मैं नृत्य कर सकूँ।
×  ×  ×  ×  ×  ×  ×  ×  ×  ×  ×  ×  ×
जब दुनिया सिमटकर एक सघन कुंज बन जाएगी,
मैं तुम्हारे पास आऊँगा।
जब दुनिया सिमटकर दो बच्चों के खेलने योग्य
एक समुद्र-तट बन जाएगी,
मैं तुम्हारे पास आऊँगा।
जब दुनिया सिमटकर संगीत-सदन बन जाएगी,
मैं तुम्हारे पास आऊँगा।
× × × × × × × × × × × × × × × × × × × × × × × × × ×
Writer- Arthur Rimbaud
Translated by-late Ramdhari Singh dinkar
Copy from dinkar's book- कविता और शुद्ध कविता


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